भारत को गांवों का देश कहा जाता है। आज भी देश की आधी से ज़्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, और उनका मुख्य व्यवसाय कृषि रहता है। बढ़ती जनसंख्या और परिवारों में होते बंटवारों के कारण खेती और ज़मीन का भी बंटवारा होता है, और इससे खेत छोटे होते जाते हैं। ऐसे में सरकार ने किसानों को उसकी ज़मीन एक ही जगह पर देने का निर्णय लिया।
चकबंदी क्या है?
ज्यादातर किसानों के खेत कई अलग अलग हिस्सों में फैले होते हैं। चकबंदी प्रक्रिया के तहत उनकी कुल ज़मीन के बराबर खेत एक ही जगह पर दे दिए जाते हैं। चकबंदी होने से किसानों को खेती करने में लागत कम आती है, साथ ही सभी खेत एक ही जगह पर होने के कारण वो उनकी देख भाल भी अच्छे से कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के 378 गांव में AI टेक्नोलॉजी की मदद से रोवर्स और ड्रोन के ज़रिए चकबंदी ( AI Chakbandi ) करने का फ़ैसला लिया गया है, इसके प्रस्ताव को राज्य सरकार ने भी हरी झंडी दिखा दी है।
चकबंदी कानून का इतिहास
भारत में चकबंदी कानून की शुरुआत सबसे पहले पंजाब प्रान्त में एक प्रयोग के रूप में हुई, और वो साल था सन् 1920, यानि ये आज़ादी से पहले की बात है। इस समय देश में अंग्रेज़ों का शासन चलता था। उस समय अंग्रेजी सरकार ने सभी नियम अपने फायदे को ध्यान में रखकर बनाए थे।
जब चकबंदी के इस प्रयोग को सफलता मिली, तो इसे सन् 1936 में कानूनी तौर पर लागू करने का विचार बनाया। इससे पंजाब में तो कुछ हद तक सफलता मिली, परंतु बाकी राज्यों ने चकबंदी को लेकर कुछ ख़ास रुझान नहीं दिखाया।
स्वतंत्रता के बाद चकबंदी
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने चकबंदी के नियमों में कुछ सशोधन किए। बदलाव के बाद बंबई में सन 1947 में पारित नियम में ऐलान किया गया कि जहां उचित हो वहां चकबंदी की प्रक्रिया को लागू किया जा सकता है। घोषणा होने के बाद इस नियम को कुछ प्रदेशों में लागू भी किया गया।

इन प्रदेशों में पंजाब, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल, बिहार और हैदराबाद शामिल थे। भारत सरकार के एक आंकड़े की मानें तो सन् 1956 तक 110.09 लाख एकड़ की ज़मीन चकबंदी क्षेत्र में आ गयी थी। वहीं वर्ष 1960 तक ये आंकड़ा बढ़कर 230 एकड़ तक हो गया।
चकबंदी अधिनियम किन राज्यों में लागू नहीं है?
भारत में चकबंदी अधिनियम सभी राज्यों में लागू नहीं है। इस अधिनियम को सरकार ने कुछ राज्यों के लिए ऐच्छिक रूप से और कुछ राज्यों के लिए अनिवार्य रूप से लागू किया था। भारत में नागालैण्ड, आन्ध्र प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, केरल, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और मेघालय में चकबंदी को लेकर कोई क़ानून नहीं है।
अनिवार्य एवं ऐच्छिक चकबंदी अधिनियम
भारत सरकार चकबंदी के नियमों में समय समय समीक्षा करती है, तथा उसमें कुछ आवश्यक परिवर्तन करती है। चकबंदी के नियम को लेकर सरकार ने जलवायु, मौसम, जनसंख्या के आधार पर कुछ प्रदेशों में इसे ऐच्छिक रूप से लागू किया।
इसका मतलब ये था कि यदि प्रदेश सरकार चाहे तो अपने प्रदेश में इसे लागू कर सकती है, और अगर किसी राज्य में चकबंदी लागू करना उचित न हो भी राज्य सरकार अपना निर्णय ले सकती है। इसके अलावा भारत के कुछ राज्यों में चकबंदी कराना अनिवार्य किया गया है।
चकबंदी अधिनियम
- चकबंदी अधिनियम के लिए प्रदेश सरकारें प्रदेश में सेक्शन 4(1) व सेक्शन 4(2) के तहत सूचना जारी करती हैं।
- इसके बाद एक और अधिसूचना जारी की जाती है, जो सेक्शन 4A(1), और सेक्शन 4A(2) के अंतर्गत चकबंदी आयुक्त द्वारा जारी की जाती है।
- इस अधिसूचना के बाद किसान की भूमि से जुड़े राजस्व न्यायालय में पड़े मुकदमे अप्रभावी हो जाते हैं, साथ ही किसान अपनी भूमि का उपयोग सिर्फ़ खेती से जुड़े कार्यों को करने के लिए बाध्य हो जाता है।
- एक चकबंदी समिति के गठन के बाद चकबंदी लेखपाल सेक्शन 7 और सेक्शन 8 के तहत भूमि का निरीक्षण कर नया नक्शा तैयार करता है।
- सेक्शन 8(a) of the Act के अंतर्गत सभी के प्रयोग में आने वाली ज़मीन को आरक्षण व अन्य कामों के लिए भी तैयार किया जाता है।
- सेक्शन 9 के अंतर्गत भूमि से संबंधित सभी विवादों को सुलझाया जाता है।
- आगे की प्रक्रिया में सेक्शन 20 के तहत साइज़ शीट 23 भागt-1 का वितरण किया जाता है।
- यदि कोई किसान चकबंदी की प्रक्रिया से असहमत है तो वो सेक्शन 48 के अंतर्गत उप संचालक चकबंदी कोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
FAQ
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1.किन राज्यों में चकबंदी का काम पूरा हो चुका है?
पंजाब व हरियाणा में चकबन्दी का काम पूरा किया जा चुका है।
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2.चकबंदी से क्या लाभ होता है? (benefit from consolidation)
चकबंदी होने से बिखरे हुए खेत एक जगह हो जाते हैं।
छोटे-छोटे खेतों की मेड़ों में भूमि बर्बाद नहीं होती है।
खेत बड़े हो जाने से मशीनीकरण आसान हो जाता है।
खेत का आकार अधिक हो जाने से लागत घट जाती है।
किसान अपने सभी खेतों की आसानी से देखभाल कर सकते हैं। -
3,भारत में सबसे पहले चकबंदी कब हुई थी?
भारत में ऐच्छिक चकबन्दी की शुरुआत स्वतंत्रता से पहले वर्ष 1920 में पंजाब प्रान्त में सहकारी समितियों की ओर से की गई थी। मध्य प्रदेश, गुजरात व पश्चिम बंगाल में ऐच्छिक चकबंदी कानून अभी भी लागू है।

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