किसान साथियों, मक्का की फसल (Maize Crop) का 30 से 45 दिन का समय सबसे अहम होता है। इस स्टेज पर पौधे तेजी से बढ़ रहे होते हैं, जड़ों का विस्तार हो रहा होता है, और भुट्टा बनने की तैयारी शुरू हो चुकी होती है।
अगर इस समय सही मात्रा में पोषण नहीं दिया गया, तो इसका सीधा असर भुट्टे के आकार, दानों की संख्या और कुल पैदावार पर पड़ेगा।

इस स्टेज पर मक्का को पोषण की क्यों जरूरत होती है?
- तेजी से पत्तियों का विकास – पौधा ज्यादा पत्ते बनाता है जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में मदद करते हैं।
- जड़ों का विस्तार – मजबूत जड़ें ज्यादा पानी और पोषक तत्व ले सकती हैं।
- भुट्टा बनने की तैयारी – इस समय पौधे को ऊर्जा और संतुलित पोषण चाहिए।
- पोषण की कमी का खतरा – नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटाश की कमी से पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, पौधा कमजोर हो सकता है और पैदावार कम हो सकती है।
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इस स्टेज पर जरूरी मुख्य पोषक तत्व
| पोषक तत्व | भूमिका | कमी के लक्षण |
| नाइट्रोजन (N) | पत्तियों की हरी रंगत, पौधे की ऊंचाई और मजबूती | पत्तियों का पीला पड़ना, धीमी बढ़वार |
| फास्फोरस (P) | जड़ों का विकास, ऊर्जा ट्रांसफर | पौधे का बैंगनीपन, कमजोर जड़ें |
| पोटाश (K) | रोग प्रतिरोधक क्षमता, दाने भरने में मदद | पत्तियों के किनारे जलना, भुट्टे का छोटा आकार |
मक्का की फसल के लिए पोषण कार्यक्रम (30–45 दिन)
1. मृदा परीक्षण (Soil Testing)
खाद डालने से पहले मृदा परीक्षण करवाना जरूरी है। इससे यह पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व की कमी है और किस मात्रा में खाद डालनी है।
2. बेसल डोज़ – यूरिया का प्रयोग
- मात्रा: प्रति एकड़ 30 किलो यूरिया
- समय: फसल की उम्र 30–35 दिन होने पर
- तरीका:
- हल्की सिंचाई या बरसात के समय डालें
- यूरिया को मिट्टी में हल्के ढंग से मिला दें ताकि गैस बनने से नुकसान न हो
- हल्की सिंचाई या बरसात के समय डालें
- लाभ: पत्तियां गहरी हरी रहेंगी, पौधे की ऊंचाई और मजबूती बढ़ेगी।
3. फोलियर स्प्रे – Gramolizer NPK
पत्तियों पर स्प्रे करने से पौधे को पोषण जल्दी और सीधे मिलता है।
विकल्प 1 – Gramolizer NPK 19:19:19
- नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित मिश्रण
- पौधे की समग्र बढ़वार और पत्तियों की हरियाली बनाए रखता है
- शुरुआती और मध्य स्टेज दोनों में असरदार
विकल्प 2 – Gramolizer NPK 00:52:34
- फास्फोरस और पोटाश की उच्च मात्रा
- जड़ों को मजबूत करता है और भुट्टे में दाना भरने की क्षमता बढ़ाता है
- फूल आने और दाना भरने के समय बेहतरीन परिणाम देता है
स्प्रे का तरीका:
- 1 लीटर पानी में 5 ग्राम NPK मिलाएं
- छिड़काव शाम के समय या बादल वाले दिन करें ताकि वाष्पीकरण कम हो
- 7–10 दिन के अंतराल पर जरूरत अनुसार दोहराएं
सही समय पर सही पोषण देने के फायदे
✔ पत्तियां गहरी हरी और स्वस्थ रहेंगी
✔ जड़ें गहरी और मजबूत बनेंगी
✔ पौधा ऊंचा और मोटा होगा
✔ भुट्टे का आकार बड़ा और दानों की संख्या ज्यादा होगी
✔ कुल पैदावार और मुनाफा बढ़ेगा
मक्का की फसल में पोषण प्रबंधन के साथ जरूरी बातें
- खरपतवार नियंत्रण – पोषक तत्वों के लिए फसल के साथ प्रतिस्पर्धा कम होगी
- समय पर सिंचाई – पोषण के अवशोषण के लिए नमी जरूरी है
- रोग और कीट प्रबंधन – पौधे स्वस्थ रहेंगे तो पोषण का पूरा फायदा मिलेगा
- पेस्टीसाइड और NPK का मिश्रण – बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें

किसानों का अनुभव
मध्य प्रदेश के किसान रामस्वरूप पटेल कहते हैं:
“पहले मेरी मक्का की फसल में पत्तियां जल्दी पीली हो जाती थीं और भुट्टा छोटा रह जाता था। इस बार 35 दिन पर 30 किलो यूरिया और Gramolizer NPK का छिड़काव किया, तो पौधे तंदरुस्त रहे और पैदावार में करीब 20% बढ़ोतरी हुई।”
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